Post by vishal tiwari

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जो विरोध में बोलेंगे, जो सच-सच बोलेंगे... मारे जाएँगे।"** राजेश जोशी की कविता **"मारे जाएँगे"** केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि हर उस दौर का आईना है जहाँ भीड़ की आवाज़ को सत्य से बड़ा बना दिया जाता है। आज, जब सोशल मीडिया की अदालतें मिनटों में फैसले सुना देती हैं, जब असहमति को अक्सर दुश्मनी समझ लिया जाता है, और जब विचारों से पहले व्यक्ति पर हमला होने लगता है—तब यह कविता पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक महसूस होती है। यह सत्ता, समाज या किसी एक विचारधारा की नहीं, बल्कि उस मानसिकता की आलोचना करती है जहाँ सवाल पूछना, सच कहना और भीड़ से अलग खड़ा होना जोखिम बन जाता है. ([Hindwi][1]) इस कविता का सबसे बड़ा संदेश यही है कि लोकतांत्रिक समाज की ताक़त एक जैसी आवाज़ों में नहीं, बल्कि अलग-अलग विचारों को सुनने की क्षमता में होती है। असहमति किसी भी स्वस्थ समाज की कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। आज मैंने इस कविता पर वीडियो बनाया है। अगर आपको लगता है कि साहित्य केवल अतीत की बात नहीं, बल्कि वर्तमान को समझने का माध्यम भी है, तो यह कविता अवश्य सुनिए। #RajeshJoshi #HindiLiterature #MareJayenge #Poetry #FreedomOfExpression #CriticalThinking #Literature #HindiPoetry

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