Post by Upneet Rajorhia
Managing Director | AKLFPCL | Building India’s Livestock Economy through SHGs, Bio-Compost, Rare Herbs and Export Value Chains
अल नीनो (El Nino) और छोटे पशुपालक: संकट से पहले सुरक्षा की तैयारी हाल ही में भारत सरकार ने देश के कई राज्यों और जिलों में अल नीनो के प्रभाव को लेकर विशेष चेतावनी जारी की हैं। बड़े डेयरी फार्म मालिकों के पास तो इस स्थिति से निपटने के साधन होते हैं, लेकिन हमारे छोटे पशुपालकों के लिए यह मौसम उनकी आजीविका पर सीधा असर डालता है। कम बारिश और अत्यधिक गर्मी के कारण छोटे पशुपालकों को मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है: बारिश कम होने से खेतों और चरागाहों में प्राकृतिक रूप से प्रचुर मात्रा में हरा चारा नहीं उग सकेगा। बाजार में सूखे चारे के दाम भी बढ़ने की आशंका रहेगी जिससे पशुओं को पेट भर भोजन देना बहुत खर्चीला हो सकता है। कुएं, तालाब और भूजल का स्तर नीचे जा सकता है। पशुओं को पीने के लिए और उनके नहाने-धोने के लिए साफ पानी जुटाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगी। अत्यधिक गर्मी (Heat Stress) के कारण पशु कम चारा खाएंगे और उनकी जुगाली कम हो जायेगी। इससे उनका हाजमा बिगड़ सकता है, पेट में एसिडिटी या गैस (अफारा) की समस्या होती है। परिणामस्वरूप, पशुओं का दूध उत्पादन 20% से 30% तक घट सकता है, जो सीधे आपकी रोज की कमाई पर चोट कर सकता है। संकट आने के बाद परेशान होने से बेहतर है कि हम आज से ही कुछ छोटी लेकिन बेहद जरूरी तैयारियां शुरू कर दें: अभी जब चारे के दाम सामान्य हैं, अपनी जरूरत के अनुसार सूखे चारे का पर्याप्त स्टॉक कर लें। यदि आपके पास अभी थोड़ा भी हरा चारा उपलब्ध है, तो उसे गड्ढे या प्लास्टिक बैग में दबाकर 'साइलेज' बना लें। यह सूखे के दिनों में पशुओं के लिए सबसे पौष्टिक और सस्ता भोजन साबित होता है। अगर आपके पास छोटी सी भी जमीन है, तो ऐसी चारे वाली फसलें बोएं जिन्हें बहुत कम पानी की जरूरत होती है (जैसे ज्वार, बाजरा या ग्वार)। पशुओं के पीने के स्थान पर पानी की टंकी को हमेशा छाया में रखें। दोपहर के समय गर्म हो चुका पानी पीने से पशु बीमार पड़ सकते हैं। पशुओं के बांधने की जगह पर सीधी धूप नहीं आनी चाहिए। शेड की छत पर फूस, पुआल या पुराने बोरे डाल दें और उन पर दोपहर में पानी छिड़कें ताकि अंदर का तापमान कम रहे। दोपहर की चिलचिलाती धूप में पशुओं को बाहर बिल्कुल न निकालें। उन्हें सुबह जल्दी या शाम को ठंडे समय में चराने ले जाएं। पशुओं के बांधने के स्थान पर हमेशा नमक का ढेला लटका कर या रखकर छोड़ दें। जब पशु उसे अपनी इच्छा से चाटता है, तो उसे अच्छी प्यास लगती है और वह ज्यादा पानी पीता है। इससे उसके शरीर में पानी और खनिजों का संतुलन बना रहता है। गर्मी में पशुओं का हाजमा ठीक रखने के लिए और चारे की कमी को पूरा करने के लिए बड़े पशुओं के आहार में रोज 50 से 60 ग्राम गौक्षेम गोल्ड, और बकरियों/भेड़ो के आहार में 15 - 20 ग्राम गौक्षेम सिल्वर नियमित देते रहें, ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम न हो। एक जरूरी सलाह: यदि आपका पशु अचानक चारा खाना बंद कर दे, जुगाली न करे या बहुत सुस्त दिखे, तो घरेलू इलाज में समय गंवाने के बजाय तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें। गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन होने पर डॉक्टर की देखरेख में दिया गया नमक-चीनी का घोल पशु के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है। विनीत, उपनीत राजोरिया प्रबंध निदेशक अमृतकाल लाइवस्टॉक फ़ार्मर्स प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड https://aklfpc.org/