Post by Sanjay Kaul
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आख़िर महादेव ने रावण को केवल एक अंगूठे से ही क्यों रोक दिया? शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि जब रावण अपने बल के अहंकार में कैलाश पर्वत को उठाने लगा, तब महादेव ने क्रोध में कोई अस्त्र नहीं उठाया, न ही युद्ध किया। उन्होंने केवल अपने पैर का अंगूठा कैलाश पर रखा। उसी क्षण रावण का सारा बल निष्फल हो गया। जो स्वयं को तीनों लोकों का सबसे शक्तिशाली समझता था, वही कैलाश के नीचे दब गया। कहा जाता है कि लंबे समय तक पीड़ा सहने के बाद रावण ने महादेव की स्तुति की। जब उसका अहंकार भक्ति में बदल गया, तब महादेव ने उसे क्षमा कर मुक्त किया और चन्द्रहास का वरदान भी दिया। यही इस कथा का सबसे बड़ा संदेश है— महादेव शक्ति का नहीं, अहंकार का अंत करते हैं। जो सिर अभिमान से ऊँचा उठता है, उसे समय झुका देता है। जो सिर श्रद्धा से झुकता है, उसे स्वयं महादेव उठा लेते हैं। हर हर महादेव। 🔱 @followers @topfans परम पूज्य प्रेमानंद जी महाराज #sanatandharma #hinduism #mahadev #shiva #Ram #mahakal