Post by Raghvendra Singh
Area Sales Manager / life’s biggest regret with Muthoot Homefin India Ltd
“एक ईमानदार इंसान की पुकार” मैंने जीवन में हमेशा ईमानदारी को अपना धर्म माना। न कभी किसी का हक छीना, न कभी अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ा। जिस संस्था को अपना परिवार समझकर दिन-रात मेहनत की, उसी ने बिना मेरी सच्चाई को समझे मुझे ऐसे कठघरे में खड़ा कर दिया मानो मैं कोई घोर अपराधी हूँ। एक पल में मेरी वर्षों की मेहनत, मेरी प्रतिष्ठा, मेरे सपने और मेरे परिवार की खुशियाँ मेरे बच्चों की शिक्षा दांव पर लगा दी गईं। मुझे सुने बिना, मुझे न्याय का अवसर दिए बिना, मेरे आत्मसम्मान तथा मेरी ईमानदारी को गहरी चोट पहुँचाई गई। सबसे बड़ा दर्द नौकरी से निकाल देने का नहीं है, बल्कि उस विश्वास के टूट जाने का है जिसे मैंने पूरी निष्ठा से निभाया था। जब एक ईमानदार व्यक्ति को बिना उनकी किसी गलती के दुर्व्यवहार करके उसे नौकरी से निकाल जाए और साथ ही संदेह की नजर से देखा जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि ईमानदारी और न्याय के मूल्यों का साथ ही उसके माता पिता द्वार दी हुई ईमानदारी निष्ठा के साथ अपना कर्तव्य पारायण की शिक्षा भी अपमान होता है। आज मैं केवल अपने लिए नहीं, उन सभी लोगों के लिए प्रश्न पूछ रहा हूँ जो सत्य और निष्ठा के साथ अपना कर्तव्य निभाते हैं— क्या ईमानदारी की यही कीमत है? क्या वर्षों की निष्ठा का प्रतिफल अपमान और अन्याय होना चाहिए? समय अवश्य गवाह बनेगा कि सत्य को दबाया जा सकता है, पराजित नहीं किया जा सकता। और इतिहास हमेशा उन लोगों को याद रखता है जिन्होंने अन्याय सहा, लेकिन सत्य का साथ नहीं छोड़ा। “मेरे साथ जो हुआ, वह केवल एक कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं था; वह ईमानदारी, मानवता और न्याय की भावना को आहत करने वाला एक निंदनीय कृत्य था।” Thanks Raghvendra Singh Raghav 🙏