Post by Raghvendra Singh
Area Sales Manager / life’s biggest regret with Muthoot Homefin India Ltd
“ईमानदारी का अपराध” एक व्यक्ति था, Raghvendra Singh जिसने अपने जीवन की सबसे बड़ी पूंजी अपनी ईमानदारी को माना था। वह हर सुबह इस विश्वास के साथ काम पर जाता था कि मेहनत और सच्चाई का सम्मान अवश्य होगा। उसने अपने परिवार की खुशियाँ, अपने बच्चों के साथ बिताने वाला समय, अपनी नींद और अपनी सुविधाएँ तक अपने काम के लिए समर्पित कर दीं। उसे गर्व था कि वह जिस संस्था के लिए काम करता है, उसकी सफलता में उसका भी योगदान है। लेकिन एक दिन सब कुछ बदल गया। जिस व्यक्ति ने कभी अपने आत्मसम्मान का सौदा नहीं किया, उसे बिना पूरी बात सुने संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। जिसने संस्था का नाम और ऊँचा करने की कोशिश की, उसी को अपनी सच्चाई साबित करने के लिए मजबूर कर दिया गया। उस दिन उसकी नौकरी ही नहीं गई, बल्कि उसके परिवार की सुरक्षा की भावना भी छिन गई। घर में बच्चों की पढ़ाई की चिंता थी, माता-पिता की दवाइयों की चिंता थी, बैंक की किश्तों की चिंता थी, और सबसे बड़ी चिंता थी—उस सम्मान की, जिसे उसने वर्षों की मेहनत से कमाया था। रातों की नींद उड़ गई, लेकिन एक प्रश्न आज भी उसके मन में गूंजता है— “अगर एक ईमानदार व्यक्ति को अपनी ईमानदारी साबित करनी पड़े, तो फिर ईमानदारी का मूल्य क्या रह जाता है?” किसी संस्था की वास्तविक पहचान उसकी ऊँची इमारतों, बड़े कारोबार या चमकदार रिपोर्टों से नहीं होती। उसकी पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कठिन समय में अपने कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार करती है। एक निर्णय फाइलों में बंद हो सकता है, लेकिन उससे प्रभावित होने वाले परिवार की पीड़ा वर्षों तक जीवित रहती है। आज भी वह व्यक्ति टूटा नहीं है। उसका विश्वास है कि सत्य को कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता। और जब कभी उसकी कहानी कही जाएगी, तो लोग यह नहीं पूछेंगे कि वह किस पद पर था। वे केवल यह पूछेंगे— “उसकी गलती क्या थी?” और शायद उत्तर होगा— “उसकी सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी थी कि वह ईमानदार था।” Thanks Raghvendra Singh Raghav 🙏