Post by Pt. SANTOSH BHARDWAJ

PALMIST

ऋग्वेद संहिता, नवम मण्डल सूक्त (1) :: ऋषि :- मधुच्छन्दा, विश्वामित्र; देवता :- पवमान, सोम; छन्द :- गायत्री। स्वादिष्ठया मदिष्ठया पवस्व सोम धारया। इन्द्राय पातवे सुतः॥ हे सोम देव! आप अत्यधिक स्वादिष्ट, हर्षप्रदायक और धाररूप में प्रवाहित होने वाले हैं। आपको इन्द्र देव के पान करने के लिए निचोड़ा गया है।[ऋग्वेद 9.1.1] Hey Som! You are very tasty, gladdening and flow as a jet. You have been extracted for Indr Dev for drinking. रक्षोहा विश्वचर्षणिरभि योनिमयोहतम्। गुणा सधस्थमासदत्॥ दुष्टों तथा असुरों के नाशक, मनुष्यों के लिए कल्याणकारी सोम शोधित होकर और कलश में स्थापित होकर यज्ञ स्थल में प्रतिष्ठित हो गए हैं।[ऋग्वेद 9.1.2] Som has been extracted for the destruction of wicked-vicious and the demons for the benefit of humans, filled in vessels and kept in the Yagy site. वरिवोधातमो भव मंहिष्ठो वृत्रहन्तमः। पर्षि राधो मघोनाम्॥ हे सोम देव! आप विकाररूप शत्रुओं को नष्ट करने वाले हैं। वृत्रासुर का वध करके आप उसका विशाल धन हमें प्रदान करें।[ऋग्वेद 9.1.3] Hey Som Dev! You destroy the enemies in the form of defects. Give us the large wealth of Vratra Sur after killing him. अभ्यर्ष महानां देवानां वीतिमन्धसा। अभि वाजमुत श्रवः॥ हे सोम देव! आप देवगणों के यज्ञ में अन्न सहित पधारने वाले हैं। आप हमें अन्न और बल प्रदान करें।[ऋग्वेद 9.1.4] Hey Som Dev! You arrive in the Yagy of demigods-deities with food grains. Grant us food grains and strength. त्वामच्छा चरामसि तदिदर्थं दिवेदिवे। इन्दो त्वे न आशसः॥ हे सोम देव! हम विधिपूर्वक नित्य आपकी सेवा करते हैं। हमारी इच्छाएँ सदैव आपको समर्पित रहती हैं।[ऋग्वेद 9.1.5] Hey Som Dev! We serve you every day methodically. Our wishes are offered to you. RIG VED ऋग्वेद ( 9.1-114) https://lnkd.in/gBpmvQyt PtSantoshBhardwaj

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