Post by PAPA NGO – Progressive Association Of Parents Awareness

Administrator at PAPA NGO

स्कूल छोड़ते बच्चे केवल आंकड़े नहीं होते... वे व्यवस्था की विफलता का आईना होते हैं। आगरा में परिषदीय विद्यालयों से 338 बच्चों के स्कूल छोड़ने और कम नामांकन पर तीन बीईओ से जवाब तलब होना बताता है कि शिक्षा व्यवस्था को केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जमीनी जवाबदेही से मजबूत करना होगा। सवाल केवल इतना नहीं कि बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं... सवाल यह भी है कि... क्या विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है? क्या अभिभावकों का सरकारी स्कूलों पर भरोसा बढ़ रहा है? क्या बच्चों की नियमित उपस्थिति और ड्रॉपआउट पर प्रभावी निगरानी हो रही है? क्या नामांकन केवल कागज़ों तक सीमित है या वास्तव में बच्चे पढ़ भी रहे हैं? PAPA NGO का मानना है कि शिक्षा विभाग को हर ड्रॉपआउट बच्चे का व्यक्तिगत कारण सार्वजनिक रिपोर्ट के रूप में दर्ज करना चाहिए और उसे दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनानी चाहिए। विद्यालय खाली होना किसी बच्चे की नहीं, व्यवस्था की हार है। हर छूटा हुआ छात्र सरकार, समाज और शिक्षा तंत्र से एक अनुत्तरित प्रश्न पूछता है। दीपक सिंह सरीन संस्थापक, प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) #PAPANGO #DeepakSinghSarin #RightToEducation #students #SchoolEducation #Dropout #GovernmentSchools #Agra #StudentRights #EducationReform #Parents #शिक्षा #आगरा #सरकारी_स्कूल #ड्रॉपआउट #छात्रहित #शिक्षा_सुधार #RTE #PAPANGOVoice

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