Post by Pandit VK Shastri
Astrologer at Bhrigu JyotirVigyan Peeth
🔱 गुप्त नवरात्रि विशेष – नवमी महाविद्या: माँ मातंगी दशमहाविद्याओं में नवमी महाविद्या माँ मातंगी को तंत्र शास्त्र में 'तांत्रिक सरस्वती' कहा गया है। जहाँ माँ सरस्वती शुद्ध ज्ञान प्रदान करती हैं, वहीं माँ मातंगी उस ज्ञान को प्रभावशाली वाणी (Speech), कला (Art), संगीत (Music), लेखन (Writing), नेतृत्व (Leadership) और जन-आकर्षण (Charisma) में बदलने की शक्ति देती हैं। इसलिए तंत्र ग्रंथों में उन्हें वाक्-सिद्धि (Vak Siddhi) तथा राजमातंगी के नाम से भी संबोधित किया गया है माँ मातंगी का पन्ने (Emerald) के समान हरित वर्ण प्रकृति, बुद्धि और निरंतर विकास का प्रतीक माना जाता है। उनके हाथों में वीणा, खड्ग, पाश और अंकुश होते हैं। वीणा नाद-ब्रह्म और संगीत, खड्ग अज्ञान के विनाश, पाश मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण, तथा अंकुश जीवन को सही दिशा देने वाली बुद्धि का प्रतीक है। उनका प्रिय पक्षी तोता है, जिसे तंत्र शास्त्र में वाणी, स्मरण शक्ति और ज्ञान के प्रसार का प्रतीक माना गया है तंत्र ग्रंथों में माँ मातंगी का सबसे बड़ा रहस्य 'उच्छिष्ट चाण्डालिनी' स्वरूप है। इसका वास्तविक अर्थ जूठन नहीं, बल्कि यह है कि ईश्वर की दृष्टि में कोई भी मनुष्य ऊँच-नीच, शुद्ध-अशुद्ध या छोटा-बड़ा नहीं होता। माँ मातंगी समाज के उपेक्षित, वंचित और तिरस्कृत लोगों को भी समान रूप से ज्ञान और सम्मान प्रदान करती हैं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि मातंग की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके घर पुत्री के रूप में अवतार लिया, इसलिए उनका नाम मातंगी पड़ा। एक अन्य तांत्रिक परंपरा में शिव-पार्वती की लीला से उनके प्राकट्य का वर्णन मिलता है ज्योतिषीय दृष्टि से अनेक परंपराओं में माँ मातंगी का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को शिक्षा, वाणी, लेखन, संगीत, पत्रकारिता, अध्यापन, वकालत, राजनीति, मीडिया या व्यापार में सफलता प्राप्त करनी हो, तो श्रद्धापूर्वक माँ मातंगी की उपासना अत्यंत शुभ मानी जाती है। 🌺 पूजा विधि एवं मंत्र: माँ मातंगी की पूजा प्रातः या सायंकाल स्नान के बाद हरे या पीले वस्त्र धारण करके करनी चाहिए। उन्हें नारियल, अनार, सुपारी, हलवा, इत्र, लाल अथवा नीले पुष्प अर्पित किए जाते हैं। पूजा के समय अपने ज्ञान, वाणी और बुद्धि को लोककल्याण के लिए समर्पित करने का संकल्प लेना चाहिए। सरल मंत्र (गृहस्थों के लिए): ॥ ॐ मातंग्यै नमः ॥ तांत्रिक बीज मंत्रों का अनुष्ठान सदैव योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। 🛕 प्रसिद्ध मंदिर :माँ मातंगी का प्रमुख उपासना स्थल श्री पीताम्बरा पीठ, दतिया (मध्यप्रदेश) माना जाता है। इसके अतिरिक्त कामाख्या शक्तिपीठ (असम) तथा दक्षिण भारत के राजमातंगी मंदिरों में भी उनकी विशेष आराधना की जाती है #MaaMatangi #Matangi #Mahavidya #DasMahavidya #GuptNavratri #TantrikSaraswati #VakSiddhi #SpeechPower #Wisdom #Knowledge #Music #Art #BudhGrah #VedicAstrology #Jyotish #SanatanDharma #Spirituality #BhriguJyotirvigyanPeeth #ExplorePage #Reels