Post by NK Goswami

Advocate at Supreme Court of India | Providing Legal Consultation Services

भरत भूषण तिवारी की मृत्यु ने बिहार की सड़कों पर जो आक्रोश पैदा किया है, उसे सामान्य विरोध समझना सत्ता की घातक भूल होगी। यह जनाक्रोश केवल एक व्यक्ति की मृत्यु पर नहीं, बल्कि उस प्रश्न पर है कि क्या लोकतंत्र में पुलिस की गोली अदालत के निर्णय का विकल्प बन सकती है? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को यह समझना होगा कि युवाओं का क्रोध खरीदा, डराया या थकाया नहीं जा सकता। यदि राज्य निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और पारदर्शिता से भागेगा, तो जनता इसे राजनीतिक प्रशासन नहीं, संवैधानिक विश्वासघात मानेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह जी को भी यह देखना चाहिए कि बिहार में भाजपा की नैतिक पूंजी किसी भी व्यक्ति-विशेष की राजनीतिक जिद से बड़ी है। न्याय दीजिए—वरना यह चिंगारी ज्वाला बनकर सत्ता के अहंकार को राख कर देगी। #JusticeForBharatTiwari #BharatBhushanTiwari #BiharYouth #BiharProtests #RuleOfLaw #PoliceAccountability #PoliticalAccountability #Democracy #ConstitutionFirst #HumanRights #TruthMustPrevail #JusticeDelayedJusticeDenied #BiharPolitics #NarendraModi #AmitShah #SamratChoudhary #IndiaNews #PublicOutrage

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