Post by Nayi Dhara
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लेखक अमरनाथ सिन्हा की लिखी लघुकथा 'अनारो'। यह कहानी नई धारा पत्रिका में जनवरी 2015 में प्रकाशित हुई थी। ---------------------------------------------------------------------- यों तो नीलकंठ बाबू अपने गाँव की पूरी परिसंपत्ति बेचकर पक्के शहरी हो गये थे, पर गाँव के प्रति उनके मोहग्रस्त भावसूत्र टूटे नहीं थे। हम रोज प्रातःभ्रमण के बहाने पार्क में मिलते, टहलते, बतियाते और बतियाते टहलते। उम्र के इस अंतिम पड़ाव पर हम दोनों अपनी पिछली जिंदगी के सूत्रों को बार-बार सुलझाते-उलझाते, जीने के नये सिरे से बहाने तलाश करते। अपने-अपने अनुभवों का विनिमय उसी बहाने का एक सलीका भर था। पूरी कहानी यहाँ पढ़ें https://lnkd.in/eBj7bJNq ------------------------------------------------ चित्र - Autumn landscape Village by Isaac Levitan, WikiArt से साभार