Post by Manish Kr. Shukla
Advocate | Founder & Secretary of H4NGO | Social Impact Leader | Legal Researcher | Investor | Working for Education & Community Development
🏛️ इलाहाबाद उच्च न्यायालय वैवाहिक घर में पत्नी की संदिग्ध मृत्यु का संतोषजनक स्पष्टीकरण न दे पाना अभियुक्तों के खिलाफ महत्वपूर्ण परिस्थिति ✅ पति एवं ससुराल पक्ष की हत्या की सजा बरकरार 📌 मुख्य बिंदु: पत्नी की मृत्यु वैवाहिक घर के अंदर हुई। मेडिकल साक्ष्य से गला घोंटकर हत्या सिद्ध हुई। पति और ससुराल पक्ष मृत्यु की परिस्थितियों का उचित स्पष्टीकरण नहीं दे सके। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में तथ्यों का विशेष ज्ञान घरवालों के पास होता है। ⚖️ लागू धाराएँ: IPC धारा 302 – हत्या IPC धारा 34 – समान आशय से किया गया अपराध भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 106 – विशेष तथ्य का ज्ञान रखने वाले व्यक्ति पर स्पष्टीकरण का दायित्व CrPC धारा 313 – अभियुक्त का बयान 📖 निर्णय: अदालत ने दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा तथा अपील खारिज कर दी। Case: रंजीत पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य #LegalUpdate #AllahabadHighCourt #IPC302 #EvidenceAct106 #CriminalLaw #AdvocateNote #Law4u