Post by KUSUM SHARMA

हिन्दी भाषा में स्वतंत्र लेखिका Freelance Writer in Hindi

17वीं शताब्दी में, भद्राचलम के तहसीलदार कंचर्ला गोपन्ना (जिन्हें 'भक्त रामदास' भी कहा जाता है) ने सरकारी खजाने के पैसों का इस्तेमाल कर भद्राचलम में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था। खजाने के दुरुपयोग के आरोप में, गोलकोंडा के तत्कालीन नवाब अबुल हसन ताना शाह ने रामदास को गोलकोंडा किले की जेल में कैद कर दिया था। किंवदंती के अनुसार, 12 वर्षों की कैद के दौरान रामदास ने भगवान राम से उन्हें बचाने की प्रार्थना की। तब स्वयं भगवान राम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने एक साधारण मनुष्य का वेश धारण किया और रात के अंधेरे में नवाब के खजाने में जाकर सारा बकाया चुका दिया। अगली सुबह, जब नवाब को रामदास का ऋण चुकाने की रसीद और सोने की मुहरें मिलीं, तो उसने पाया कि रसीदों पर स्वयं राम और लक्ष्मण के हस्ताक्षर थे। इस चमत्कार को देखने के बाद नवाब ने रामदास को तुरंत रिहा कर दिया और उनसे अपनी गलती की माफी मांगी। आज भी गोलकोंडा किले में उस जेल की कोठरी मौजूद है, जहां भक्त रामदास को कैद रखा गया था। इस कोठरी की दीवारों पर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान जी की आकृतियां उकेरी हुई हैं। उपरोक्त कथानक लिखने का तात्पर्य यह है कि भगवान श्रीराम सत्य हैं और वे सत्य की रक्षा करते हैं और असत्य को दंड देते हैं। भगवान से बड़ा न्यायाधीश और कोई नहीं है। प्रसंग आप सब समझ गए होंगे। अपनी आस्था को डगमगाने नहीं देना है, दृढ़तापूर्वक विरोधी बातों को अनसुना कर देना है। शेष श्री राम कुशल मंगल करेंगे। #हिन्दी #लिंक्डिन #श्रीराम #अयोध्या #hindi #linkedin #ayodhya #hindicontentwriting #storywriting #proofreadinginhindi #freelancer #freelancerwriter