Post by Jyoti Yadav
𝗠𝗲𝗺𝗼𝗶𝗿 𝗪𝗿𝗶𝘁𝗲𝗿, 𝗕.𝗖𝗼𝗺, 𝟳 𝗦𝗰𝗵𝗼𝗼𝗹𝘀(𝙄𝙣𝙛𝙞𝙣𝙞𝙩𝙚 𝙒𝙞𝙨𝙙𝙤𝙢), 𝗙𝗶𝗻𝗱𝗶𝗻𝗴 𝗣𝗵𝗶𝗹𝗼𝘀𝗼𝗽𝗵𝘆 𝗶𝗻 𝗘𝘃𝗲𝗿𝘆𝘁𝗵𝗶𝗻𝗴 & 𝗻𝗲𝘃𝗲𝗿 𝘀𝘁𝗼𝗽𝗽𝗶𝗻𝗴 𝘁𝗼 𝗹𝗲𝗮𝗿𝗻.
20.01.2024 Written by Jyoti Yadav First published in Amar Ujala. poem: जब मेरे भीतर कोई ऐब न रहे जब मेरे भीतर कोई शरारत न रहे जब मेरे भीतर कोई अच्छी बात न रहे जब मेरे भीतर कोई जिद न रहे जब मेरे भीतर कोई लालच न रहे जब मेरे भीतर कोई नफरत न रहे जब मेरे भीतर किसी के लिए प्यार ना रहे जब मेरे भीतर मेरे बचपन का यार न रहे जब मेरे भीतर बच्चों के प्रति प्यार न रहे जब मेरे भीतर बुजुर्गो के प्रति सम्मान ना रहे जब मेरे भीतर कोई गलती ना रहे जब मेरे भीतर किसी को देने के लिए ज्ञान न रहें और, जब मैं भूल जाऊ बड़े से सफेद मकान को उसमे रहने वाले मेरे दादा-दादी के एहसास को जब दुख में मेरे आंसू सूख जाएं जब सुख में खिलखिलाकर ना हंसूं जब मेरे सारे सपने मर जायेंगे उस दिन, मैं मरना चाहूंगी, पर, मैं चाहती हूं कि मैं हमेशा जिंदा रहूं अपने ऐबों के साथ अपनी शरारतों के साथ अपनी अच्छी बातों के साथ अपनी जिद के साथ अपनी गलतियों के साथ दादा-दादी की याद के साथ बचपन की यारी के साथ मैं चाहती हूं कि मैं हमेशा अपने सपनों को जिंदा रखूं और हां मैं मरना नहीं चाहती!!! और जब सबके हाथ मुझे दुआएं देने को उठेंगे, मैं मानूंगी मेरा पुनर्जन्म हुआ!