Post by Gajanan Krishna Maharaj

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महाशिवरात्रि एवं भगवान शिव महाशिवरात्रि आदि गुरु शिव को समर्पित् है जिनमें अस्तित्व और सृजन दोनों समाये हुए हैं । शिव ही वो विशाल शून्यता है जो हमें यथार्थ से बांधे रखती है। शिवरात्रि सबके लिए महत्वपूर्ण है चाहे वो सांसारिक व्यक्ति हो या फिर साधक। शिव अस्तित्व की वो रिक्तता हैं जिसमें सारा सृजन है और शिवरात्रि ना सिर्फ अपनी समस्त महत्वाकांक्षाओं को पूरी करने और अपने शत्रुओं वर विजय प्राप्ति की रात्रि है बल्कि अपने अस्तित्व की सीमितता को विसर्जित करके सृजन के असीम स्रोत को अनुभव करने की रात्रि है। यह अतुलनीय रात्रि हमें नवीनतम आध्यात्मिक आयाम पर ले जाती है क्योंकि इस रात्रि को नॉर्थेर्न हेमिस्फर इस प्रकार से अव्यवस्थित होता है कि हमारे अंदर की भीतरी ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से विकास होता है। इसी रात्रि को शिव पूर्ण रूप से स्थिर हुए थे और उनके अंदर की सारी गतिविधियां शांत हुई थीं और इसी रात्रि को भौतिकता से परे आधात्मिक वास्तविकता का विकास होता है। शिव के दोनों नेत्र सांसारिक वास्तविकता हैं तो तीसरा नेत्र आध्यात्मिकता के नवीनतम आयामों तक ले जाता है। इन नए आयामों को ग्रहण करने के लिए रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए रात्रि जागरण आवश्यक है।साधकों के लिए यह रात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रात्रि व्यक्तित्व की उस एकात्मकता को जानने की रात है जब हमारे अंदर ऊर्जा परम ऊर्जा से प्रभावित होती है। #ShivaRatri #Shivaratri2021 #GkmSays #MahaShivaratri2021 #TechyPanditJi #Gkmastrology

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