Post by Darshan Singh

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## **"सारी पृथ्वी मंदिर, चर्च और मस्जिदों से भरी है, लेकिन धर्म कहाँ है?"** **— ओशो** सारी पृथ्वी मंदिर, चर्च और मस्जिदों से भरी है। धर्म कहाँ है? लेकिन, हालात उल्टी है। मंदिर और चर्चों के बढ़ने से धर्म नहीं बढ़ा। अगर इनमें जाने वाले लोग धार्मिक हैं, तो वो कौन से मुसलमान थे जिन्होंने हिंदुओं की हत्या की? और वो कौन से हिंदू हैं जो मुसलमानों की हत्या करते हैं? वो कौन से कैथोलिक हैं जो प्रोटेस्टेंट को मारते रहे? और वो कौन से प्रोटेस्टेंट हैं जो उनके दुश्मन हैं? इन मंदिरों, मस्जिदों में जाने वाले लोग अगर धार्मिक हैं, तो फिर ये धर्म के नाम पर इन मंदिरों-मस्जिदों से निकली हुई हत्याओं का ब्यौरा कौन देगा? कौन करेगा ये हिसाब? इतनी हत्या फिर किसके सर जाएगी? **नहीं साहब।** ये मंदिर और मस्जिद में जाने वाला आदमी बड़ा खतरनाक है, क्योंकि जिस दिन ये चुनता है कि **ये मंदिर धर्म का है,** उसी दिन ये कहने लगता है कि दूसरा जो चर्च है और मस्जिद है, वो धर्म की नहीं। और जो धर्म का नहीं है, उसको मिटाना इसका कर्तव्य हो जाता है। जिस दिन ये चुनाव करता है कि **ये मंदिर भगवान का है,** उसी दिन ये कह देता है कि **ये जो मस्जिद है, वो भगवान की नहीं, शैतान की है।** इसके चॉइस, इसके चुनाव में घोषणा हो गई दूसरे के अधर्म होने की। **अब लड़ाई शुरू होगी।** **— ओशो** #Religion #Spirituality #ReligiousHarmony #Unity #Compassion #Empathy #Ethics #CivilSociety #Pluralism #Coexistence #ConstitutionalValues #HumanRights #Peacebuilding #Dialogue #SocialJustice #Respect #Understanding #Mindfulness #InclusiveLeadership #ThoughtLeadership

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