Post by BriefX Studio

4 followers

#जीवन_का_अर्थ: #एक_संवाद समय की धारा में बहकर, जब मन भीतर से टूट गया, तब भी उम्मीद की एक किरण, मुझको हर पल साथ मिली। फसल सूख कर गिर जाए तो, मिट्टी फिर से उर्वर है, अगली वर्षा की बूंदों में, फिर से जीवन के संकेत मिले। जो साथ नहीं हैं दुःख में आज, उनसे क्या अब बैर करूँ? जो संग नहीं थे मुश्किल में, उनकी यादों का अब क्या मोल करूँ? छोटी-छोटी खुशियाँ ही तो, जीवन का असली आधार बनीं, प्रतीक्षा की हर एक घड़ी में, धैर्य की नई परिभाषा मिली। कड़वे शब्दों के घाव भरे, मैने खुद को फिर से सी लिया, प्रिय वचनों की अब आस नहीं, मैंने खुद को ही अपना लिया। काया रोग का घर हो यदि, तो भी सांसें अभी भी जारी हैं, सुख-साधन के बिना भी देखो, जीने की पूरी तैयारी है। - डॉ. निकेष परिहार | Dr Nikesh Parihar #HindiPoetry #Everyone

Post content