Post by Beena Gupta
Founder | Podcaster | Pranic Healer & Trainer
*AWGP- LITERATURE GURUDEV* ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्! *युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा* जब हम रेल में चढ़ते हैं और दूसरे लोग पैर फैलाये बिस्तर जमाये बैठे होते हैं तो हमें खड़ा रहना पड़ता है। उन लोगों से पैर समेट लेने और हमें भी बैठ जाने देने के लिए कहते हैं तो वे लड़ने आते हैं। झंझट से बचने के लिए हम खड़े-खड़े अपनी यात्रा पूरी करते हैं और मन ही मन उन जगह घेरे बैठे लोगों की स्वार्थपरता और अनुदारता को कोसते हैं। पर जब हमें जगह मिल जाती है। तो हम भी वैसा ही व्यवहार करते हैं। उसी तरह पैर फैला लेते हैं और नये यात्रियों के प्रति ठीक वैसे ही निष्ठुर बन जाते हैं। क्या यह दुहरा दृष्टिकोण उचित है? हमारी कन्या विवाह योग्य हो जाती है तो हम चाहते हैं कि लड़के वाले बिना दहेज के सज्जनोचित व्यवहार करते हुए विवाह सम्बन्ध स्वीकार करें, दहेज मांगने वालों को बहुत कोसते हैं। पर जब अपना लड़का विवाह योग्य हो जाता है तो हम भी ठीक वैसा ही अनुदारता दिखाते हैं जैसी अपनी लड़की के विवाह अवसर पर दूसरों ने दिखाई थी। कोई हमारी चोरी, बेईमानी कर लेता है, ठग लेता है तो बहुत बुरा लगता है, पर प्रकारान्तर से वैसी ही नीति अपने कारोबार में हम भी बरतते हैं और तब उस चतुरता पर प्रसन्न होते और गर्व अनुभव करते हैं। यह दुमुंही नीति बरती जाती रही तो मानव समाज में सुख-शान्ति कैसे कायम रह सकेगी? *क्रमशः* *........* #AWGP-LITERATUREGURUDEV #GayatriPariwar #AWGPwithINDIA #PanditShreeRamSharmaAcharya #awgpofficial #Ojas. #Vedic #awgp #startup #Wellness #Health #inspiring #Meditation #Mindfulness #InnerPeace #SpiritualGrowth #YogaAndMeditation #StressRelief https://lnkd.in/gmfMk6Ur