Post by Avinash Yadav

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जैसा कि हम बचपन से सुनते आए हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। बचपन में गाँव में रहते हुए मैंने इसका अर्थ वास्तव में समझा। हमारे अधिकांश पूर्वज खेती करते थे। आज की भाषा में कहें तो वे नौकरी नहीं, बल्कि अपना व्यवसाय करते थे। उस समय गाँव में सबसे समृद्ध वही माना जाता था जिसके पास सबसे अधिक पशुधन, हल और बैल होते थे। आज तकनीक के दौर में सब कुछ एक क्लिक पर मिल जाता है, लेकिन भारत की सबसे बड़ी ताकत आज भी उसकी भूमि और कृषि है। एक पॉडकास्ट में Mallika Bajaj (CEO, Ballistic Learning Systems) ने कहा था, "India is rich Baki Sab Banjar Jameene." मुझे लगता है कि भारत की असली समृद्धि उसकी भौगोलिक विविधता और कृषि क्षमता में भी छिपी है। अगर हम UAE को देखें, तो उन्होंने आधुनिक शहर और तकनीक विकसित कर ली है, लेकिन खेती के लिए वे आज भी दूसरे देशों पर निर्भर हैं। वहीं भारत की उपजाऊ भूमि, विविध जलवायु और अलग-अलग प्रकार की मिट्टियों ने हमें सदियों से कृषि सम्पन्न बनाया है। शायद यही कारण था कि अंग्रेज़ व्यापार करने आए और बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी स्थापित कर बैठे। पंजाब का गेहूँ, बिहार और पश्चिम बंगाल का धान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गन्ना, कपास और जूट—ये सब हमारी भौगोलिक विशेषताओं का परिणाम हैं। उत्तर का मैदान, दक्षिण का पठार और अलग-अलग प्रकार की मिट्टियाँ खेती के लिए बेहद अनुकूल रही हैं। मुझे बचपन की बरसात भी याद है। 25–30 साल पहले कई-कई दिन लगातार बारिश होती थी। नदियाँ और तालाब भर जाते थे। आज जलवायु परिवर्तन के कारण वह दृश्य कम दिखाई देता है। भारत की तीनों ऋतुएँ—गर्मी, बरसात और सर्दी—हमें रबी, खरीफ और ज़ायद जैसी तीनों फसलें उगाने का अवसर देती हैं। आज हमने व्हाइट-कॉलर नौकरियों को अधिक महत्व देना शुरू कर दिया है, लेकिन भारत के कई सफल उद्योगपति कृषि और कृषि-आधारित व्यवसायों में भी निवेश कर रहे हैं। अभी आम का मौसम है—दशहरी, चौसा और लंगड़ा जैसी किस्में केवल फल नहीं, बल्कि हमारी कृषि विरासत की पहचान हैं। हमारे यहाँ खेती का रिश्ता संगीत से भी रहा है। धान की रोपाई के समय कजरी गाई जाती थी, जिसकी जन्मस्थली उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर माना जाता है। मिर्जापुर केवल एक वेब सीरीज़ का नाम नहीं, बल्कि लोकसंगीत, संस्कृति और कृषि परंपरा का भी केंद्र है। मुझे लगता है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत केवल तकनीक या उद्योग नहीं, बल्कि उसकी धरती, किसान, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा ज्ञान है। आधुनिकता ज़रूरी है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है। SAURABH SINGH https://lnkd.in/grAbraJr

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